किताब
उनको मेरा दर्द कागज़ पर कला लगा |
मेरे टूटे हुए शब्दों को एहसास बता कर मुझे कलाकार बताया...
उनको मेरा दर्द कागज़ पर कला लगा |
मेरे टूटे हुए शब्दों को एहसास बता कर मुझे कलाकार बताया |
कहा, की तुम सच में कलाकार हो देखो !! देखो !!
दुखी हो कर भी कितने नायाब हो |
वो सब मेरी आँखों से निकले आँसु तक को कला कहते गए |
पर असल में मेरे दिल की बात को फिर अनसुना कर गए |
मैंने कोशिश की थी की शब्दों से दर्द साँझा करने की, वो तो मेरे दुःख को भी वाह! वाह! कह गए |
आखिर ये सच में साबित हो गया, कह कर भी मैं सब अकेला ही हो गया |
और कागज़ पर लिखे इन शब्दों को मैं किताब कह गया |
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