प्यारी माँ... एक सवाल

प्यारी माँ... एक सवाल

मुझे याद बहुत आती है माँ तेरी
अक्सर खाना पकाते वक्त, अकेले खाना खाते वक्त
वो सारे काम खुद अकेले करते वक्त
जो तुमने बिना थके, बिना रुके हमारे लिए किए ||
आख़िर कैसे! माँ
आख़िर कैसे! तुमने खुद को भुला दिया
हमारी पहचान बनाने में ||
आख़िर कैसे! तुमने आग लगा दी खुद के अरमानों में ||
क्यों चुना परिवार को खुद से पहले
आख़िर क्या मिला खुद से पहले हमें रख के ||
बहुत बेचैन करते हैं मुझे ये सवाल
किया क्या मैंने तेरे बलिदान के साथ ||